लखनऊ: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने बुधवार (04 फरवरी) को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने केवल पद ही नहीं निकाले, बल्कि सेवा आवंटन, डिजिटल सुरक्षा और योग्यता के नियमों में भी बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य “सर्विस होल्डिंग” को रोकना और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
अब कार्यरत IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और IFS (भारतीय वन सेवा) अधिकारी दोबारा सिविल सेवा परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य परीक्षा (Mains) से पहले किसी उम्मीदवार की नियुक्ति इन सेवाओं में हो जाती है, तो उन्हें मेन्स देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
IPS के लिए ‘नो रिपीट’ पॉलिसी
IPS अधिकारियों के लिए नियम सख्त किए गए हैं। यदि कोई उम्मीदवार पहले से ही IPS (भारतीय पुलिस सेवा) के लिए चुना जा चुका है, तो वह CSE 2026 के माध्यम से दोबारा IPS का विकल्प (Option) नहीं चुन सकेगा। उसे पदोन्नति के लिए IAS या IFS जैसी अन्य सेवाओं के लिए ही प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
ट्रेनिंग और इस्तीफे से जुड़े नए नियम
ग्रुप-A सेवा: यदि कोई उम्मीदवार ग्रुप-A सेवा में चयन के बाद दोबारा परीक्षा देना चाहता है, तो उसे संबंधित विभाग से ट्रेनिंग में शामिल न होने की विशेष छूट (Exemption) लेनी होगी।
इस्तीफे की अनिवार्यता: CSE 2025 या उससे पहले सेवा में आए उम्मीदवारों को 2026 और 2027 में बिना इस्तीफा दिए परीक्षा देने का अंतिम अवसर मिलेगा। लेकिन 2028 से, किसी भी कार्यरत अधिकारी को दोबारा परीक्षा में बैठने के लिए अपनी वर्तमान पोस्ट से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए UPSC ने तकनीक का सहारा लिया है:
फेशियल रिकॉग्निशन: पहचान की चोरी (Impersonation) रोकने के लिए AI-आधारित चेहरा पहचानने वाली तकनीक का उपयोग होगा।
आधार लिंक्ड पोर्टल: उम्मीदवारों को अब एक नए चार-चरणों वाले डिजिटल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, जो पूरी तरह आधार से लिंक होगा। आधार वेरिफिकेशन के बिना फॉर्म नहीं भरा जा सकेगा।
शैक्षणिक योग्यता
IAS के लिए: किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Bachelor’s Degree).
IFS के लिए: एनिमल हसबेंडरी, वेटरनरी साइंस, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मैथ्स, फिजिक्स, स्टैटिस्टिक्स, जूलॉजी या एग्रीकल्चर जैसे विशिष्ट विषयों में स्नातक डिग्री अनिवार्य है।