बरेली: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ मुखर होकर चर्चा में आए पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार को बरेली के परशुराम धाम पहुंचे। यहां उन्होंने शासन से मिले आरोप पत्र (चार्जशीट) पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि शासन ने उन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर आरोप पत्र थमाया है, जिन्हें उन्होंने अपने इस्तीफे में उठाया था।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि देश की सरकार खुद भेदभाव के कानून बनाकर समाज को बांट रही है। जब मैं अपने वर्ग के हक के लिए आवाज उठाता हूं, तो मुझे चार्जशीट थमा दी जाती है। यह आरोप पत्र नहीं, बल्कि सच को दबाने की कोशिश है। उन्होंने शासन के इन आरोपों को पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया है।
इस्तीफे में दर्ज था संतों का अपमान और ‘रॉलेट एक्ट’ का जिक्र
अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को कमिश्नर के माध्यम से भेजे अपने इस्तीफे में दो मुख्य प्रकरणों का उल्लेख किया था। पहला- प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानन्द जी के शिष्यों और बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई मारपीट। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज का देशव्यापी अपमान बताया था।
दूसरा- भारत सरकार द्वारा जारी UGC रेगुलेशन 2026, जिसे उन्होंने 1919 के ‘रॉलेट एक्ट’ जैसा काला कानून बताया था। उनका आरोप था कि ये नियम सामान्य वर्ग (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ आदि) के छात्रों के प्रति विषमता और शोषण को जन्म देंगे।
गीदड़ भभकियों से नहीं झुकेंगे, अब दिल्ली कूच की तैयारी
अलंकार अग्निहोत्री ने साफ किया कि वे इन प्रशासनिक कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण किया जाए। उन्होंने वर्तमान सत्ता को ‘देशी सरकार’ के बजाय ‘विदेशी जनता पार्टी’ की सरकार करार दिया।
अग्निहोत्री ने ऐलान किया है कि अब उनकी लड़ाई बरेली से निकलकर सीधे दिल्ली की दहलीज तक पहुंचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के जनप्रतिनिधि अपने समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉर्पोरेट कंपनी के नौकर की तरह काम कर रहे हैं।