नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार (01 फरवरी) को लगातार अपना 9वां बजट पेश किया है। लोकसभा में उनका बजट भाषण कुल 85 मिनट रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल से लेकर आयकर टैक्स के लिए कई ऐलान किए हैं। बजट में तो बस इम्पोर्ट ड्यूटी के घटने-बढ़ने से सामानों के दाम थोड़े बहुत ऊपर-नीचे होते हैं। चलिए, जानते हैं कि इस बजट से क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा?
कैंसर की दवाइयां सस्ती: 17 लाइफ सेविंग ड्रग्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म
सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए बाहर से मंगवाई जाने वाली दवाओं और स्पेशल फूड पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे उन परिवारों को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी जो इलाज के लिए महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं।
माइक्रोवेव ओवन सस्ते: पुर्जों पर ड्यूटी घटी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में कुछ अहम बदलाव किए हैं। अब माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई है। इससे आने वाले दिनों में माइक्रोवेव की कीमतों में कमी आ सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में दुनिया का हब बने।
EV बैटरी और सोलर पैनल सस्ते: इसे बनाने का कच्चा माल हुआ टैक्स फ्री
एनर्जी ट्रांजेक्शन को देखते हुए सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों (कॅपिटल गुड्स) पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है। अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर भी ड्यूटी नहीं लगेगी। वहीं, सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले ‘सोडियम एंटीमोनेट’ पर भी ड्यूटी हटा दी गई है, जिससे देश में सोलर पैनल बनाना सस्ता होगा।
सी-फूड, जूते, कपड़े सस्ते होने की उम्मीद: एक्सपोर्ट बढ़ाने कच्चे माल पर छूट
- एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए सरकार ने समुद्री उत्पाद, लेदर और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए घोषणाएं की हैं।
- सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी फ्री इनपुट की लिमिट 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है।
- लेदर और सिंथेटिक जूतों के साथ-साथ अब ‘शू अपर्स’ के एक्सपोर्ट पर भी टैक्स छूट मिलेगी।
- एक्सपोर्ट का सामान तैयार करने की समय सीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल किया गया है।
सस्ता क्यों होगा?
जब कंपनियों को सामान बनाने के लिए कच्चा माल सस्ता मिलेगा, तो प्रॉडक्शन की लागत कम होगी। अगर कंपनियां इस बचत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो आने वाले समय में लेदर के जूते, स्पोर्ट्स शूज और सी-फूड की कीमतों में कमी आ सकती है या कम से कम दाम स्थिर रहेंगे।
हवाई सफर और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सस्ता: पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी हटी
नागरिक उड्डयन को बढ़ावा देने के लिए एयरक्राफ्ट बनाने में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। डिफेंस सेक्टर में भी एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस और रिपेयरिंग (MRO) के लिए मंगवाए जाने वाले कच्चे माल पर अब टैक्स नहीं देना होगा। इससे देश में हवाई जहाज बनाने और उनकी मरम्मत करने की लागत कम होगी।
विदेश से मंगवाए सामान सस्ते होंगे: पर्सनल यूज की चीजों पर टैक्स घटा
विदेश से अपने निजी इस्तेमाल के लिए सामान मंगवाने वालों के लिए भी अच्छी खबर है। सरकार ने ऐसे सामान पर लगने वाली टैक्स की दर को 20% से घटाकर सीधे 10% कर दिया है। इसके अलावा, विदेश यात्रा से लौटने वाले यात्रियों के लिए सामान (बैगेज) क्लियरेंस के नियमों को भी आसान बनाया जाएगा और फ्री अलाउंस की सीमा बढ़ाई जाएगी।
GST काउंसिल तय करती है ज्यादातर चीजों के दाम
आज आपकी थाली की सब्जी से लेकर आपके हाथ के स्मार्टफोन तक, ज्यादातर चीजों के दाम GST काउंसिल तय करती है, न कि वित्त मंत्री। 22 सितंबर 2025 से GST के चार स्लैब को घटाकर दो कर दिया था।
अब केवल 5% और 18% के स्लैब में GST लगता है। GST काउंसिल की 56वीं मीटिंग में इस पर फैसला लिया गया था। इससे घी, पनीर खरीदने से लेकर कार और AC खरीदना भी सस्ता हो गया है।


किसानों-पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए बजट में क्या?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बताया कि किसानों-पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए बजट में क्या-क्या योजनाएं हैं।
छोटे और सीमांत किसानों की आय में इजाफा लाने पर जोर। तमाम मौकों के जरिए दिव्यांगों के सशक्तीकरण पर फोकस।
मत्स्य पालन के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा। तटीय क्षेत्रों में फिशरीज वैल्यू चेन मजबूत की जाएंगी।
स्टार्टअप और महिलाओं की अगुवाई वाले समूह बाजार से जुड़ेंगे।
पशुपालन क्षेत्र के लिए लोन-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम शुरू होंगे।
पुशधन उद्यमों का संवर्धन और आधुनिकीकरण होगा। पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, काजू जैसी फसलों को सहायता दी जाएगी। नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना लाई जाएगी।
भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम लाए जाएंगे। इन्हें वैश्विक ब्रांड बनाने का काम किया जाएगा।
भारतीय चंदन लकड़ी की गरिमा को पुनर्स्थापित करने के लिए राज्यों से सहयोग किया जाएगा।
अखरोट, बादाम की पैदावार बढ़ाने के लिए भी विशेष कार्यक्रम शुरू होगा।
AI टूल- भारत-VISTAAR कार्यक्रम की शुरुआत होगी। यह बहुभाषी एआई टूल किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।
अगर बजट में ड्यूटी आज बदली, तो दुकान पर सामान कल से ही सस्ता मिलेगा?
नहीं, यह सबसे बड़ा भ्रम है। बजट में टैक्स बदलने का असर ‘नए स्टॉक’ पर पड़ता है। जो सामान दुकानदार की शेल्फ पर पहले से रखा है, वह पुरानी कीमत पर ही बिकेगा। बजट का असर दिखने में समय लगता है। वहीं, दाम घटना या बढ़ना तय नहीं होता। यह पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर करता है। कई बार सरकार ड्यूटी घटाती है, लेकिन कंपनियां अपना प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के लिए कीमतें कम नहीं करतीं। इसी तरह, अगर कच्चा माल अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हो जाए, तो टैक्स घटने के बावजूद दाम स्थिर रह सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। यानी, कुछ भी तय नहीं होता।
22 सितंबर 2025 को जो GST बदलाव हुए, क्या बजट उन्हें बदल सकता है?
नहीं, बजट में वित्त मंत्री के पास GST स्लैब बदलने का अधिकार नहीं होता। इसके लिए GST काउंसिल की अलग से मीटिंग होती है। बजट केवल इंपोर्ट ड्यूटी को घटा या बढ़ा सकता है ।