उत्तर प्रदेश, राजनीति

संभल में 48 घंटे में दूसरी बार बदले गए CJM, आदित्य सिंह की जगह दीपक कुमार जायसवाल आए  

संभल में 48 घंटे में दूसरी बार बदले गए CJM, आदित्य सिंह की जगह दीपक कुमार जायसवाल आए  

संभल: संभल जिले में 48 घंटे में दूसरी बार नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की तैनाती की गई है। अब कौशांबी के सीजेएम दीपक कुमार जायसवाल को संभल का नया सीजेएम बनाया गया है। वहीं, संभल सीजेएम आदित्य सिंह को वापस सिविल जज (सीनियर डिवीजन), चंदौसी भेज दिया गया है। इसके अलावा, नावेद अख्तर को जूनियर डिवीजन जज, संभल से अपर सीनियर डिवीजन सिविल जज, चंदौसी नियुक्त किया गया है।

आदित्य सिंह को दो दिन पहले ही प्रमोशन दिया गया था। उन्हें विभांशु सुधीर की जगह CJM संभल बनाया गया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ वकीलों में काफी नाराजगी थी। आदित्य सिंह ने ही संभल के श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद दावे पर सर्वे के आदेश दिए थे। विभांशु को सुल्तानपुर में सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर भेजा गया था।

कौन हैं संभल के नए सीजेएम?

नवनियुक्त CJM दीपक कुमार जायसवाल मूल रूप से महराजगंज जिले के रहने वाले हैं। वे बीते 11 साल से न्यायिक सेवा में कार्यरत हैं। अपने 11 साल के करियर में उनके अब तक 16 तबादले हो चुके हैं। संभल जिले में CJM स्तर पर हुए इस बदलाव को न्यायिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

मंगलवार शाम किए थे 14 जजों के तबादले

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार की शाम बड़ा फेरबदल करते हुए 14 जजों के तबादले कर दिए थे। लिस्ट में चौंकाने वाला नाम विभांशु सुधीर का था। विभांशु ने 9 जनवरी को ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। आरोप है कि संभल हिंसा के दौरान ASP अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने एक युवक को गोली मार दी थी।

संभल में 48 घंटे में तीन CJM

20 जनवरी- CJM विभांशु किशोर का ट्रांसफर किया

21 जनवरी- आदित्य सिंह को चार्ज, वकीलों ने किया विरोध

22 जनवरी- आदित्य का तबादला, दीपक जायसवाल नए CJM बने।

जज के ट्रांसफर से भड़के थे वकील

विभांशु सुधीर के तबादले के बाद वकील भड़क गए थे। बुधवार को वकीलों ने चंदौसी कोतवाली के पास सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। वकीलों ने यूपी सरकार और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। जज के ट्रांसफर को न्याय की हत्या बताया था। कहा था कि अच्छे जज को डिमोट जा रहा है। वकीलों का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश के बाद उनका तबादला किया गया।

अधिवक्ता रोशन सिंह यादव ने कहा था कि भगवान भी अच्छे लोगों को सजा नहीं देता। ये गलत ट्रांसफर है। एक अच्छे जज को सजा देने का अधिकार किसी को नहीं। हमारी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मांग है कि उनका ट्रांसफर रद्द किया जाए। सरकार और प्रशासन के दबाव में जज का ट्रांसफर किया गया है। ये असहनीय है।

जज विभांशु को वापस बुलाने की मांग

बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश यादव ने कहा था कि जज विभांशु जिले में न्याय व्यवस्था के लिए बेहतरीन काम कर रहे थे। उनके कार्यकाल में 8-8 दिन में फैसले हुए हैं। पुलिस और ASP अनुज चौधरी के खिलाफ आदेश देने पर उनका ट्रांसफर किया गया। उनका ट्रांसफर रद्द होना चाहिए। उन्हें संभल जिले में वापस बुलाना चाहिए।

कहां-कहां तैनात रहे विभांशु?

साल 2013 में सुल्तानपुर जिले में ये पहली बार एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनाए गए।

साल 2015 में सिविल जज मुसाफिरखाना-सुल्तानपुर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन बनाए गए।

उसके बाद एटा में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बने, फिर मुरादाबाद, चंदौली, गाजियाबाद में भी सेवाएं दीं।

सितंबर, 2025 में ये संभल के चंदौसी में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनाए गए।

पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश क्यों हुए?

संभल में नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन में रहने वाले यामीन ने CJM कोर्ट में 6 फरवरी, 2025 को याचिका दायर की थी। यामीन ने बताया था कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी थी। यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। 9 जनवरी, 2026 को कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। यामीन के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया। कोर्ट से पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR की मांग की गई थी।

SP ने कहा था- फैसले के खिलाफ अपील करेंगे

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा था कि हिंसा की ज्यूडिशियल इन्क्वायरी हो चुकी है, इसलिए ये FIR दर्ज नहीं की जाएगी। हम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

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