प्रयागराज: माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक मैं वसंत पंचमी का स्नान नहीं करूंगा। प्रशासन सिर्फ नोटिस-नोटिस का खेल खेल रहा है। अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो मैं वसंत का स्नान कैसे कर लूं?
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि पहले मौनी अमावस्या का स्नान करूंगा, तभी दूसरा स्नान करूंगा। मुझे पहले मौनी अमावस्या का स्नान करवाएं। उन्होंने कहा कि गो-माता की रक्षा के लिए प्रेरणा यात्रा निकाली। गो-माता की रक्षा करना हमारा परम धर्म है। अगर अब भी तेज आवाज में नहीं बोला गया, तो वही होता रहेगा, जो 78 सालों से होता आ रहा।
‘सम्मान से स्नान नहीं तो प्रवेश नहीं’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के व्यवहार से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक हम अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। सम्मानपूर्वक स्नान कराना हमारी मांग है, कोई विशेष सुविधा नहीं। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और संत समाज के स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है।
माघ मेले में आज वसंत पंचमी का स्नान चल रहा है। सुबह 4 बजे से श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं। संगम नोज पर जबरदस्त भीड़ है। गुरुवार शाम को बाबा रामदेव ने सतुआ बाबा के संग डुबकी लगाई। हालांकि, 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे और तभी से यह विवाद जारी है।
उपाधि से दायित्व बढ़ता है, विवाद का अंत होना चाहिए: बाबा रामदेव
माघ मेले से अयोध्या पहुंचे बाबा रामदेव ने कहा कि माघ मेला स्नान, ध्यान, तप और संतों की साधना का पावन पर्व है। इसमें किसी भी प्रकार का विवाद हमारे बड़ों ने नहीं सिखाया। किसी प्रकार की उपाधि है किसी के पास तो उसका दायित्व उतना ही बढ़ जाता है। ये जो विवाद हो रहा है, इससे सनातन का अनादर हो रहा है। सभी को ध्यान देना चाहिए कि हम साधु बने तो साधुता की पहली सीढ़ी निरभिमानी है। भगवान के दासत्व में रहना है। लड़ाई करने के लिए हिंदू, सनातन और भारत विरोधी ताकतें हैं। हम क्यों विवाद में पड़ें। अब इस विवाद का अंत हो जाना चाहिए। सभी को संयम बरतना चाहिए।
योगी बोले– कुछ लोग सनातन को कमजोर कर रहे
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद का बिना नाम लिए गुरुवार को कहा- किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं। ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा। संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता।
सीएम योगी ने जिस कालनेमि का जिक्र किया, वह रामायण में रावण का मामा और मारीच का बेटा था। रावण ने उसको लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान को रोकने के लिए भेजा था। बाद में हनुमान ने कालनेमि का वध कर दिया था।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से मारपीट का मामला पहुंचा राज्य मानवाधिकार आयोग
माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित मारपीट का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मामले की आयोग से शिकायत की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। शिकायत में कहा गया है कि मेला प्रशासन और पुलिस ने शंकराचार्य के धार्मिक काफिले को संगम की ओर जाने से रोका और इस दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।
इससे मौके पर तनाव और अव्यवस्था की स्थिति बन गई। जब संतों और अखाड़ों को स्नान और धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दी गई, तो शंकराचार्य के काफिले को रोकना गलत और भेदभावपूर्ण है। अगर भीड़ नियंत्रण या सुरक्षा कारणों से रोक जरूरी थी, तो वह सभी के लिए समान होनी चाहिए थी। भविष्य में ऐसे आयोजनों में संतों और श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए साफ दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।