लखनऊ: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और दुद्धी विधायक विजय सिंह गोंड का SGPGI में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष अवधनारायण यादव ने की। लंबे समय से बीमार चल रहे विजय सिंह की दोनों किडनी खराब हो गई थी, जिसके चलते उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था।
प्रदेश की 403वीं अंतिम विधान सभा सीट दुद्धी के आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’ कहे जाने वाले गोंड के निधन से पूरे सोनभद्र और आस-पास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। विजय सिंह गोंड आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करने वाले अग्रणी नेताओं में शुमार थे। उनके निधन पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने दु:ख जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड आज हमारे बीच नहीं रहे, उन्होंने सदा आदिवासी भाइयों के लिए काम किया, उसका परिणाम यह रहा कि जनता ने हमेशा उनका साथ दिया।
"समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड आज हमारे बीच नहीं रहे, उन्होंने सदा आदिवासी भाइयों के लिए काम किया, उसका परिणाम यह रहा कि जनता ने हमेशा उनका साथ दिया।"
– माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/Nruws0D5WI
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) January 8, 2026
कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव में मिली थी जीत
दुद्धी और ओबरा विधानसभा को अनुसूचित जनजाति सीट घोषित कराने के लिए विजय सिंह गोंड ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने सन् 1979 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सन् 1989 में अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर उन्होंने आदिवासी राजनीति में नया अध्याय लिख दिया।
कांग्रेस से पहली बार विजय सिंह गोंड 1980 में विधायक बने। 1985 में कांग्रेस, 1989 में निर्दल, 1991 और 1993 में जनता दल, 1996 और 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विजय सिंह गोंड लगातार जीतते रहे। मुलायम सिंह यादव के सरकार में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2007 और 2012 के चुनाव में आरक्षण के चलते ऐन वक्त पर चुनाव मैदान से बाहर होने के बाद भी विजय सिंह ने अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए समर्थित प्रत्याशी को जीत दिलाई थी। वर्ष 2017 में उन्हें अपना दल-एस के हरिराम चेरो ने 1085 मतों से हराया था।
वहीं, 2022 के चुनाव में भाजपा के रामदुलार गोंड ने उन्हें 6725 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में रामदुलार के अयोग्य होने के बाद वर्ष 2024 में उपचुनाव हुआ था। सत्ताधारी दल की ओर से पूरी ताकत लगाने के बावजूद विजय सिंह गोंड 3018 वोटों के अंतर से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे और आठवीं बार विधायक चुने गए थे। विजय सिंह गोंड ने सदन में आदिवासी समाज के अधिकारों को मजबूती से उठाया और उन्हें मुख्यधारा में लाने का उल्लेखनीय प्रयास किया। विजय सिंह गोंड के निधन से राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है। नेता, कार्यकर्ता और समर्थक उनके निधन को अपूरणीय क्षति मान रहे हैं।