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सिद्धांत से समझौता न करने वालों की याद में स्वाभिमान पर्व, Somnath Swabhiman Parv पर PM मोदी ने साझा की तस्वीरें

सिद्धांत से समझौता न करने वालों की याद में स्वाभिमान पर्व, Somnath Swabhiman Parv पर PM मोदी ने साझा की तस्वीरें

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (08 दिसंबर) को सोमनाथ मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को याद किया। उन्होंने कहा कि 31 अक्‍टूबर, 2001 को सोमनाथ में आयोजित कार्यक्रम में मैंने भाग लिया था, जब 1951 में पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। प्रधानमंत्री ने बताया कि 1951 का वह ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में संपन्न हुआ था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल, केएम मुंशी सहित कई महान विभूतियों का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। उन्होंने यह भी याद किया कि 2001 के कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री आडवाणी और अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए थे।

सोशल मीडिया पर किया पोस्‍ट

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि जय सोमनाथ! सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आज से शुरू हो रहा है। जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला हमला हुआ था, लेकिन 1026 के हमले और उसके बाद हुए आक्रमण भी करोड़ों लोगों की आस्था और उस सभ्यतागत चेतना को नहीं तोड़ सके, जिसने सोमनाथ को बार-बार खड़ा किया।

उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2026 में 1951 के भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का स्मरण भी किया जा रहा है। उन्होंने ‘जय सोमनाथ’ के उद्घोष के साथ बताया कि आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ हो रहा है। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से आग्रह किया कि यदि वे भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ साझा करें।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन

सोमनाथ मंदिर को पहले से कहीं ज्यादा भव्य स्वरूप प्रदान किया। विध्वंस से पुनरुत्थान तक 1,000 वर्षों के इसी सफर पर 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत 11 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। वर्ष 2026 इस वजह से भी बेहद खास है कि क्योंकि यह मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ है। सन् 1951 में इसकी आधुनिक प्राण प्रतिष्ठा सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों का नतीजा थी।

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