इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से अब तक हुईं 15 मौतों के मामले में नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है। इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया है।
रोहित सिसोनिया को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेजा गया है। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है। इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया है।

इससे पहले, मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी, इसमें दूषित पानी से सिर्फ चार मौत होने की बात कही है। सरकार की रिपोर्ट तब आई है, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के जरिए 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। सभी को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। कुछ को बुखार भी था। इनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 6 जनवरी को
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, इंटर विनर (हस्तक्षेप कर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में रिपोर्ट पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की।
बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।
पूर्व गृह मंत्री ने कहा– दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी नेता हिम्मत कोठारी ने कहा कि इस मामले में जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे। दोषियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कोठारी ने इंदौर की घटना को देखते हुए रतलाम जिला प्रशासन एवं नगर निगम को सतर्क रहकर प्रभावी कार्रवाई के लिए आगाह किया है।
इंटरवीनर के एडवोकेट बोले– चार मौतों का डिक्लेरेशन
हाईकोर्ट में इंटरवीनर वरुण गायकवाड़ की ओर से केस लड़ रहे एडवोकेट ऋषि आनंद ने कहा कि शासन का कहना है कि सिर्फ चार मौत हुई हैं। ये बड़ी ही शॉकिंग बात है कि जिस दिन याचिका दायर हुई थी, उसी दिन समाचार पत्र में 11 मौतों की पुष्टि की थी, आठ के तो फोटो भी छापे गए थे। शासन का चार मौतों का डिक्लेरेशन, स्थिति को छोटा बताने की कोशिश है। इसके पीछे का कारण और स्रोत अचंभित करने वाला है।
राहुल बोले– जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की। फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
राहुल ने लिखा- ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है।
उमा भारती बोलीं– घटना ने पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा किया
अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने लिखा- साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।
उमा भारती ने आगे लिखा- जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती, क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। पीड़ितजन से माफी मांगनी होगी। नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं, उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।