लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन की राह अलग करते हुए अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया है। यह फैसला बुधवार को राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कांग्रेस सांसदों की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। बैठक के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि आगामी पंचायत चुनाव पार्टी स्वतंत्र रूप से लड़ेगी और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में पूरी ताकत झोंकेगी।
इस घोषणा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि हाल तक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कह चुके थे कि कांग्रेस और सपा मिलकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और गठबंधन जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का एक बड़ा रणनीतिक प्रयोग मान रहे हैं, जिसके जरिए पार्टी अपना जनाधार फिर से मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।
संगठन विस्तार पर फोकस
बैठक में प्रदेश की सभी विधानसभाओं में संगठन विस्तार, स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को अधिक मौका देने और चुनावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। कांग्रेस का यह कदम संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक पहल माना जा रहा है। पार्टी पंचायत चुनाव में अकेले उतरकर अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को टिकट देना चाहती है, जिससे स्थानीय स्तर पर जनाधार बढ़ाया जा सके। कांग्रेस का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव में मिली कड़ी हार और 2024 लोकसभा चुनाव के परिणामों की पृष्ठभूमि में आया है।
#WATCH | दिल्ली: उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा, "एक खास बैठक हुई जिसमें 14 तारीख को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश से जो भी सहयोग चाहिए, उस पर विस्तार में बात हुई। आने वाले चुनावों, पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक जिन… pic.twitter.com/Oq4oTlcTa4
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 3, 2025
लोकसभा 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यूपी की 80 में से 43 सीटें जीती थीं, लेकिन इसमें सपा को 37 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को केवल 6 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। बिहार में भी गठबंधन के बावजूद कांग्रेस को निराशा मिली थी। इन परिणामों के बाद, पार्टी अब कई राज्यों में अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए ‘एकला चलो’ की राह अपनाकर अपने संगठन और वोट बेस को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुट गई है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के इस निर्णय पर अभी तक समाजवादी पार्टी ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।