ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-बांग्लादेश) ने सोमवार (17 नवंबर) को मौत की सजा सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए कहा कि वे अधिकतम सजा की हकदार हैं। इसी के साथ न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला छह पार्ट में सुनाया, जो 400 पेज में है।
जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं। ट्रिब्यूनल ने एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपनी मौत तक जेल में रखने का भी फैसला दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है, हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है, शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए।
बांग्लादेश की अदालत ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है। महीनों तक चले मुकदमे में उन्हें पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह पर घातक कार्रवाई का आदेश देने का दोषी पाया गया: रॉयटर्स https://t.co/IyxbOWGJzz pic.twitter.com/yOImhCW6cu
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 17, 2025
शेख हसीना ने दिए थे छात्रों पर बम गिराने के आदेश
ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए।
भारत में हैं शेख हसीना
गौरतलब है कि शेख हसीना इस वक्त भारत में हैं। उन्होंने ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि उन पर लगे सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं और वे ऐसे फैसलों की परवाह नहीं करतीं। आईसीटी के फैसले से पहले अपने समर्थकों को जारी एक ऑडियो संदेश में हसीना ने कहा था कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार उनकी पार्टी को खत्म करना चाहती है। हसीना ने कहा था कि यह इतना भी आसान नहीं है। आवामी लीग जमीन से उठी पार्टी है।
ट्रिब्यूनल में शेख हसीना और उनके मंत्री हसनुल हक इनु के बीच कई बार फोन पर हुई बातचीत भी पढ़कर सुनाई जा रही है, जिससे अवामी लीग के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका हिंसा में साबित की जा सके। यह बताया जा रहा है कि किस तरह से शेख हसीना ने छात्रों के प्रोटेस्ट को आतंकी गतिविधि के रूप में पेश करने की कोशिश की।
शेख हसीना और अन्य ने रची आपराधिक साजिश
ट्रिब्यूनल ने कहा कि ज्यादातर मौतें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों की ओर से आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले घातक धातु के छर्रों से भरी सेना की बंदूकों से चली गोलियों के कारण हुईं। शेख हसीना की सरकार में सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं। शेख हसीना और अन्य आरोपियों ने संयुक्त रूप से आपराधिक साजिश रची थी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना के साथ ही इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ने मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध किए। राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ।
पूर्व गृह मंत्री को भी फांसी की सजा
कोर्ट ने दूसरे आरोपी पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को 12 लोगों की हत्या का दोषी माना है और इसके लिए फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, तीसरे आरोपी पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल के जेल की सजा सुनाई है। ममून सरकारी गवाह बन चुके हैं।
कोर्ट ने हसीना और असदुज्जमां कमाल की प्रॉपर्टी जब्त कर ली है। फिलहाल, दोनों नेता बांग्लादेश से फरार हैं और पिछले 15 महीने से भारत में रह रहे हैं।
अटॉर्नी जनरल बोले- मारे गए लोगों को न्याय मिला
फैसले के बाद अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि जुलाई क्रांति में मारे गए लोगों और देश दोनों को ही अब न्याय मिल गया है।
ट्रिब्यूनल के अनुसार, करीब 1400 लोगों की हत्या की गई और 11 हजार से अधिक लोग हिरासत में लिए गए, गिरफ्तार किए गए। ट्रिब्यूनल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने भी देखा कि राजनीतिक नेतृत्व के निर्देश पर हिरासत में यातनाएं दी गईं। ऐसी घटनाओं की कई रिपोर्ट्स भी हैं। बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो भी जब्त किए गए हैं और इन्हें खंगाला जा रहा है। इन वीडियोज से पता चलता है कि किस तरह प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या की गई। इनमें से कई वीडियो यूट्यूब चैनलों पर दिखाए भी जा चुके हैं। एक ऐसे गवाह ने भी ट्रिब्यूनल के सामने गवाही दी, जिसका चेहरा विकृत कर दिया गया था।
ट्रिब्यूनल ने कहा- घायलों के इलाज नहीं करने के दिए गए निर्देश
ट्रिब्यूनल ने कहा कि कई वीडियो में हेलीकॉप्टर से लोगों पर गोलीबारी भी दिखी है। घायलों को अस्पताल में भर्ती नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे। एक वीडियो में दिखा कि एक प्रदर्शनकारी की दोनों आंखों से खन बह रहा था और वह मदद की गुहार लगाता रहा। कुछ प्रदर्शनकारियों को पांच मीटर की दूरी से गोली मारी गई, कई को कई गोलियां मारी गईं।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया। गवाहियों से यह भी सामने आया कि डॉक्टर्स को निर्देश दिया गया था कि वे किसी भी घायल को भर्ती न करें और पहले से भर्ती मरीजों को भी न छोड़ें। डॉक्टर्स की गवाही से स्पष्ट है कि पुलिस-प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के इलाज में बाधा डाली। कुछ डॉक्टर्स को पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए मजबूर किया गया और धमकाया गया।
शेख हसीना बोलीं- सभी आरोप गलत, मुझे फैसले की परवाह नहीं
ट्रिब्यूनल ने यह भी बताया कि शेख हसीना के खिलाफ कौन-कौन से साक्ष्य मिले हैं। फैसले से पहले पूरे मामले को पढ़कर रिकॉर्ड में रखा गया, इसलिए प्रक्रिया लंबी चली और फैसला आने में समय लगा। राजधानी ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शन की स्थिति में प्रदर्शनकारियों को गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। शेख हसीना ने फैसले से पहले अपने समर्थकों को भेजे वीडियो संदेश में खुद पर लगे आरोपों को गलत बताया और कहा कि फैसला दे दें, मुझे परवाह नहीं है।