काठमांडू: नेपाल के काठमांडू में तख्तापलट के दो दिन बाद गुरुवार को Gen-Z नेता सामने आए। अनिल बनिया और दिवाकर दंगल ने कहा कि युवाओं का यह विरोध-प्रदर्शन बुजुर्ग नेताओं से तंग आकर किया है। हमारा मकसद संविधान नहीं, संसद भंग करना है।
Gen-Z लीडर अनिल ने कहा, ‘हमने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अपील की, वो राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने आगजनी और तोड़फोड़ की।’ वहीं, दंगल ने कहा, ‘हम नेतृत्व संभालने में सक्षम नहीं हैं। हमें परिपक्व होने में समय लगेगा। हमें तोड़ने की कोशिश की जा रही है।’ उन्होंने बताया कि ऑनलाइन सर्वेक्षणों के जरिए Gen-Z ने पीएम पद के लिए वोट दिया।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रो पड़े Gen-G लीडर सुदान गुरुंग
आंदोलनकारी नेताओं में से एक, सूदान गुरुंग काठमांडू में मीडिया को संबोधित करते हुए भावुक हो गए और रो पड़े।
#WATCH | Nepal: Sudan Gurung, one of the Gen-Z leaders, gets emotional and breaks down as he addresses the media in Kathmandu. pic.twitter.com/R0cozVReOy
— ANI (@ANI) September 11, 2025
अंतरिम पीएम पर अब तक सहमति नहीं बनी
अंतरिम पीएम को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। गुरुवार सुबह आर्मी के हेडक्वार्टर में Gen-Z और अफसरों के बीच बातचीत दूसरी बार शुरू हुई। इसमें पहले पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनने की खबर आई थीं, लेकिन दोपहर एक बजे तक ‘लाइट मैन’ कहे जाने वाले कुलमान घीसिंग का नाम सामने आ गया।
उधर, आर्मी ने एहतियातन राजधानी और उससे सटे इलाकों में तीसरे दिन कर्फ्यू जारी रखा है। नेपाल हिंसा में अब तक 34 मौतें हुई है, जबकि 1300 से ज्यादा लोग घायल हैं।
सेना मुख्यालय के बाहर Zen-G प्रदर्शनकारियों में लड़ाई
भद्रकाली स्थित नेपाली सेना मुख्यालय के बाहर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन तनाव जारी रहा। अंतरिम सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इस बात पर Zen-Z आंदोलनकारी बंट गए हैं। एक ओर पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के समर्थक थे, तो दूसरी ओर काठमांडू के मेयर बालेन शाह के समर्थक। दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई और मामला झगड़े तक पहुंच गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, झगड़ा तब शुरू हुआ जब युवाओं का एक समूह कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने का विरोध करने लगा। इसके जवाब में उनके समर्थकों ने नारे लगाए। जल्द ही बालेन शाह का समर्थन करने वाले प्रदर्शनकारी और धरान के मेयर हरका संपांग से जुड़े कुछ लोग भी इस विवाद में कूद पड़े। नारेबाजी हाथापाई में बदल गई और यह इलाका अराजकता का केंद्र बन गया। सेना के जवानों को हालात काबू में लाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
नेपाल में सुरक्षा बलों की भूमिका पर उठे सवाल
काठमांडू में राष्ट्रपति आवास, सिंह दरबार (प्रशासनिक मुख्यालय), सुप्रीम कोर्ट और संसद भवन की सुरक्षा न हो पाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन ऐतिहासिक और संवेदनशील इमारतों में आगजनी और तोड़फोड़ कर दी, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने में नाकाम रहे। वर्तमान में पूरी सुरक्षा जिम्मेदारी संभाल रही नेपाली सेना की भी आलोचना हो रही है। कई लोग कह रहे हैं कि सेना खुद उन इमारतों की रक्षा नहीं कर पाई, जहां वह तैनात थी।
नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक राजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति कार्यालय और सिंह दरबार जैसे ऐतिहासिक स्थलों को नहीं बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे, आगजनी रोकने की कोई ठोस रणनीति नहीं अपनाई गई। यह चौंकाने वाली स्थिति थी।
पूर्व लेफ्टिनेंट ने उठाए सवाल
हालांकि, नेपाली सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बिनोज बसन्यात ने सेना पर उठ रहे सवालों को साजिश बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सेना की आलोचना की जा रही है। उनके मुताबिक, उस समय सेना और पुलिस पहले से ही दबाव में थीं और गोली चलाने जैसी स्थिति नहीं थी
ओली की पार्टी बोली- तबाही की निष्पक्ष जांच हो
केपी शर्मी ओली की पार्टी CPN-UML ने नेपाल के हालात पर प्रतिक्रिया दी। पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल ने बयान जारी कर कहा कि विरोध प्रदर्शनों में हुई जान-माल की तबाही की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
UML ने कहा कि 13,000 से ज्यादा कैदियों का जेल से भाग जाना शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया गया था, तो इतनी बड़ी तोड़फोड़ और हिंसा कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि सुरक्षा एजेंसियां इतने बड़े पैमाने की हिंसा और विनाश को क्यों नहीं रोक पाईं।
राष्ट्रपति बोले- प्रदर्शनकारियों की मांगों के समाधान की कोशिश
अध्यक्ष राम चंद्र पौडेल ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारी दलों की मांगों को पूरा करने और समस्या का समाधान करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। एक बयान जारी करते हुए पौडेल ने बताया कि वह लोकतंत्र की रक्षा तथा शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के बारे में चर्चा कर रहे हैं। राष्ट्रपति पौडेल वर्तमान में सैन्य सुरक्षा में हैं।