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झारखंड के पूर्व CM शिबू सोरेन का निधन, पीएम मोदी समेत कई दिग्‍गत नेताओं ने जताया शोक

झारखंड के पूर्व CM शिबू सोरेन का निधन, पीएम मोदी समेत कई दिग्‍गत नेताओं ने जताया शोक

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन का सोमवार (04 अगस्‍त) को निधन हो गया है। दिशोम गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध 81 वर्षीय सोरेन ने आज सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, उन्हें सुबह 8.56 बजे मृत घोषित किया गया। सोरेन पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। इससे उनके शरीर के बाईं ओर पैरालिसिस हो गया था।

वे पिछले एक महीने से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। वे बीते एक साल से डायलिसिस पर थे। उन्हें डायबिटीज थी और हार्ट की बायपास सर्जरी भी हो चुकी थी। बीते कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।

बेटे हेमंत सोरेन ने दी जानकारी

झारखंड सीएम और शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने पोस्ट कर उनके निधन की जानकारी दी।

झारखंड CM और शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने पोस्ट कर निधन की जानकारी दी।

PM मोदी ने शिबू सोरेन के निधन पर जताया दु:ख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में तरक्की की। वे आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध थे। उनके निधन से दुःख हुआ। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से बात की और संवेदना व्यक्त की। ओम शांति।”

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लालू ने शिबू सोरेन के साथ बिताए पलों को याद किया

JMM संस्थापक शिबू सोरेन के निधन पर RJD नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा, “शिबू सोरेन का निधन हो गया है। वह दलितों और आदिवासियों के एक महान नेता थे और मेरे उनसे अच्छे संबंध थे। मुझे दुख है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे… यह राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है।”

सीएम योगी ने भी जताया शोक

प्रियंका गांधी ने परिवारजनों के प्रति जताई संवेदनाएं

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर कहा, “…हम सभी के लिए यह बहुत दुखद सूचना है। परिवारजनों के प्रति हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।”

UPA कार्यकाल में रहे थे कोयला मंत्री

शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक थे। वह यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्री रह चुके थे। हालांकि, चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

13 साल में हुई थी पिता की हत्या

81 साल के दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म वर्तमान रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा में 11 जनवरी 1944 को हुआ। गांव के ही स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लिए दिशोम गुरु का जीवन संघर्षों भरा रहा है। महज 13 साल की उम्र के थे, जब उनके पिता की हत्या महाजनों ने कर दी। इसके बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ संघर्ष का फैसला किया।

शिबू सोरेन से ‘दिशोम गुरु’ बनने की कहानी

पिता की हत्या के बाद उन्हें लगा कि पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज को इकट्‌ठा करना। उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ काम करना शुरू किया। सन् 1970 में वे महाजनों के खिलाफ खुल कर सामने आए और धान कटनी आंदोलन की शुरुआत की। सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाकर शिबू सोरेन चर्चा में आए, लेकिन महाजनों को अपना दुश्मन बना लिया। शिबू को रास्ते से हटाने के लिए महाजनों ने भाड़े के लोग जुटाए। उन दिनों आदिवासियों को जागरूक करने के लिए शिबू सोरेन बाइक से गांव-गांव जाते थे।

इसी दौरान एक बार उन्हें महाजनों के गुंडों ने घेर लिया। बारिश का मौसम था। बराकर नदी उफान पर थी। शिबू सोरेन समझ गए कि अब बचना मुश्किल है। उन्होंने आव देखा न ताव, अपनी रफ्तार बढ़ाई और बाइक समेत नदी में छलांग लगा दी। सभी को लगा उनका मरना तय है, लेकिन थोड़ी देर बाद शिबू तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पहुंच गए। लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार माना। आदिवासियों ने शिबू को ‘दिशोम गुरु’ कहना शुरू कर दिया। संथाली में दिशोम गुरु का अर्थ होता है देश का गुरु।

शिबू सोरेन पर एक नजर

  • जन्म: 11 जनवरी 1944, रामगढ़, झारखंड
  • 1957 में 13 साल की उम्र में पिता की हत्या के बाद पढ़ाई छोड़ी।
  • 1969 पहला विधानसभा चुनाव CPI के टिकट पर रामगढ़ से लड़ा, लेकिन हार गए।
  • 1970 के दशक में सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।
  • 1972 में अलग आदिवासियों के हक और अलग राज्य की मांग के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा बनाया।
  • 1980 में दुमका से लोकसभा चुनाव लड़े। पहली बार सांसद बने।
  • 1985 में जामा सीट से विधायक बने और 1989 में दुमका से फिर सांसद बने।
  • मार्च 2005 मे पहली बार CM बने। बहुमत साबित नहीं करने पर दस दिन में इस्तीफा दिया।
  • अगस्त 2008 को दूसरी बार झारखंड के सीएम बने । उपचुनाव हारने पर पांच महीने बाद इस्तीफा दिया।
  • दिसंबर 2009 में तीसरी बार झारखंड के सीएम बने। कार्यकाल 5 महीने का रहा।
  • 2014 लोकसभा चुनाव जीते।
  • 2020 से राज्यसभा सांसद थे।

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