प्रयागराज: संगम नगरी में आयोजित हुए 45 दिवसीय महाकुंभ के दौरान राज्य के तीन एक्सप्रेसवे पर गुजरने वाले वाहनों ने रिकॉर्ड बना दिया। इस साल जनवरी-फरवरी के दौरान आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से 40 लाख से अधिक वाहन गुजरे। इस दौरान 564 सड़क हादसे हुए, जिनमें 40 लोगों की मौत हुई। यह जानकारी यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी (यूपीडा) की ओर से साझा की गई है।
यूपीडा के अनुसार, सुरक्षा के लिए एक्सप्रेसवे के प्रत्येक पैकेज में एक सुरक्षा अधिकारी, दो सहायक सुरक्षा अधिकारी, प्रति शिफ्ट चार पूर्व सैनिक और प्रति शिफ्ट एक वाहन चालक को तैनात किया गया था। एक एक्सप्रेसवे औसतन दो से चार पैकेज में बंटा होता है। एक जनवरी से 28 फरवरी 2025 के बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से रिकॉर्ड 28.40 लाख वाहन गुजरे। इसी अवधि में वर्ष 2024 में ये संख्या करीब 17 लाख और वर्ष 2023 में 16 लाख थी। यानी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 70 फीसदी ज्यादा वाहनों ने फर्राटा भरा।
ओवरस्पीडिंग और हादसे भी खूब
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से बीती जनवरी-फरवरी में लगभग 15.10 लाख वाहन गुजरे। वर्ष 2024 में इस एक्सप्रेसवे से करीब 10 लाख और वर्ष 2023 में 7 लाख वाहन गुजरे थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से महाकुंभ की अवधि में 2.87 लाख वाहन गुजरे। वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से ड्राइविंग में भी खूब लापरवाही सामने आई। इससे 564 हादसों में 40 लोगों की मौत हो गई और 524 लोग घायल हुए। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीड के 8.45 लाख से ज्यादा चालान किए गए। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर ये संख्या 6.64 लाख से ज्यादा रही। एक्सप्रेसवे सबसे ज्यादा कारों ने फर्राटा भरा। तीनों एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले कुल वाहनों में कारों की हिस्सेदारी लगभग 65% रही।