बरेली: श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में श्रीराम मूर्ति स्मारक ट्रस्ट के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय श्रीराम मूर्ति जी के 116वीं जन्म तिथि (08 फरवरी) पर 25वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। इसमें बीटेक, बीफार्मा, एम फार्म, एमटेक, एमबीए, एमसीए (श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी बरेली, श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च बरेली), एमबीए (श्रीराम मूर्ति स्मारक आईबीएस, उन्नाव), बीए एलएलबी (लॉ कॉलेज, बरेली) पाठ्यक्रमों में सत्र 2024-2025 में उत्तीर्ण 305 छात्र-छात्राओं को उपाधियां, प्रशस्ति पत्र एवं पदक वितरित किए गए।
सीईटी और सीईटीआर में बी.टेक (2021-2025 बैच) में सर्वाधिक अंक हासिल करने के लिए क्रमशः हर्ष सक्सेना और उत्कर्ष जायसवाल को ‘श्रीराम मूर्ति गोल्ड मैडल’ के साथ 51,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। सीईटी की पूजा काराकोटी, निजारिश उमर, राज कुशवाहा और अमूल्य शर्मा ने अपने कोर्स में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर गोल्ड मेडल संग 21000 रुपये नकद प्राप्त किए। खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए सीईटी के देवेश गंगवार और सीईटीआर के सौरभ सिंह को ट्रॉफी के साथ ‘विशेष पुरस्कार’ दिया गया।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विवि के कुलपति का संदेश
दीक्षांत समारोह में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विवि के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) जय प्रकाश पाण्डेय ने विद्यार्थियों को भविष्य में सफलता के लिए आशीर्वाद दिया और इसके लिए अपना विजन और मिशन खुद बनाने की सलाह दी। उन्होंने सफलता के लिए सकारात्मक सोच को आवश्यक बताया और इसके लिए उत्साह (मोटिवेशन) के साथ प्रतिबद्धता (कमिटमेंट) को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि उत्साह के साथ जब प्रतिबद्धता दोगुनी हो तब सफलता मिलने का मौका चार गुना बढ़ जाता है।

श्रीराम मूर्ति शतिक सभागार में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विवि के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) जय प्रकाश पांडेय की अध्यक्षता में रविवार सुबह आयोजित दीक्षांत समारोह में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नई दिल्ली के चेयरमैन प्रोफेसर (डॉ.) प्रदीप कुमार जोशी मुख्य अतिथि और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर इसरो अहमदाबाद के हेड-एम्पलीफायर डिवीजन की साइंटिस्ट/ इंजीनियर-जी पूजा श्रीवास्तव विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं। इन अतिथियों के साथ एसआरएमएस ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी देव मूर्ति, ट्रस्ट सेक्रेटरी आदित्य मूर्ति, गुरु नारायण मेहरोत्रा, सीईटी के प्रिंसिपल डॉ. प्रभाकर गुप्ता, सीईटीआर के डीन डॉ. शैलेश सक्सेना और आईबीएस के डीन डॉ. तरुण सिंह गंगवार ने संस्थान के प्रांगण में स्थित स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मंत्री स्वर्गीय श्रीराम मूर्ति जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं सभागार में दीप प्रज्वलन किया।
श्रीराम जी की जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
विद्यार्थियों की सरस्वती वंदना, संस्थान गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ दीक्षांत समारोह आरंभ हुआ। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति ने प्रेरणास्रोत्र स्वर्गीय श्रीराम मूर्ति जी को उनके 116वें जन्मदिन पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया और सभी डिग्रीधारकों एवं मेधावी छात्र/छात्राओं को उनकी उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने एसआरएमएस ट्रस्ट द्वारा विगत वर्षो में किए गए शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक उत्थान के प्रयास से तकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षो में एसआरएमएस ट्रस्ट द्वारा संचालित महाविद्यालयों के अध्यापक एवं छात्र/छात्राएं तकनीकी रिसर्च एवं इनोवेशन के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। जबकि यहां के एल्युमिनाई दुनिया भर में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं द्वारा अपनी पहचान को पुख्ता कर रहे हैं। इन्हीं में आज दीक्षांत समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप मे आई पूजा श्रीवास्तव भी एक हैं, जो संस्थान के पहले बीटेक बैच 1995 की छात्रा रही थीं।
एसआरएमएस विमको फैक्ट्री में बनाएगा स्किल यूनिवर्सिटी, मेडिकल ट्रामा सेंटर
देव मूर्ति ने एसआरएमएस ट्रस्ट की ओर से विमको फैक्ट्री खरीदे जाने की भी जानकारी दी। कहा कि यहां ट्रस्ट द्वारा आठ फैकल्टी के साथ स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की तैयारी है। इसके साथ ही यहां पर 150 बेड का अत्याधुनिक हास्पिटल एवं मेडिकल ट्रामा सेंटर, इंडस्ट्रियल पार्क, आईटी पार्क और को-वर्किंग स्पेस भी विकसित किया जाएगा। इंडस्ट्रियल पार्क में एसआरएमएस के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्टार्टअप लगाने का अवसर दिया जाएगा। जिसमें उन्हें होने वाला किसी भी तरह का फाइनेंशियल रिस्क एसआरएमएस ट्रस्ट वहन करेगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के वाक्य उठो, जागो और तब तक नहीं रूको, जब तक लक्ष्य की पूर्ति न हो जाये से अपने वकतव्य समाप्त किया।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमार जोशी ने वर्ष 1971 में स्वतंत्रता सेनानी श्रीराम मूर्ति जी से मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आप क्या छोड़ कर जाते हैं यह सबसे महत्वपूर्ण है। जिस तरह महान स्वतंत्रता सेनानी श्रीराम मूर्ति जी समाज के लिए अपने आदर्श और विकसित समाज का सपना छोड़ कर गए। उन्हीं को यह संस्थान आगे बढ़ा रहा है। एआई टैक्नालाजी और उसके महत्व और चुनौतियों के बारे में उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। कहा कि आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करके भारत 2047 तक आत्मनिर्भर बन सकता है। लेकिन इसके लिए सकारात्मक विचार आवश्यक हैं।
विद्यार्थियों को बताया सपना पूरा करने का मंत्र
डॉ. जोशी ने सफलता के लिए विद्यार्थियों को सपना देखने और उसे पूरा करने को सबसे बड़ा मंत्र बताया। इसके लिए उन्होंने अनुकूलनशीलता को नई स्थिरता बताया। कहा कि करियर विकसित होंगे, भूमिकाएं बदलेंगी और कौशल पहले से कहीं अधिक तेजी से अप्रचलित हो जाएंगे। सीखने, पुरानी बातों को भूलने और नई बातें सीखने की आपकी तत्परता ही आपकी सफलता का राज होगी। डॉ. जोशी ने नैतिकता को प्रौद्योगिकी से आगे निकलना पर जोर दिया। कहा कि चाहे आप एल्गोरिदम डिजाइन करें, दवाएं विकसित करें, उद्यम प्रबंधित करें, कोड लिखें या कानून की व्याख्या करें। याद रखें कि नैतिकता के बिना प्रगति प्रतिगमन के समान है।
डॉ. जोशी ने वैश्विक सोच में भारतीय जड़े खोजने पर जोर दिया। कहा कि वैश्विक स्तर पर सोचें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन अपने राष्ट्र के मूल्यों, चुनौतियों और आकांक्षाओं से जुड़े रहें। साथ ही उन्होंने नौकरी चाहने वालों से ज्यादा नौकरी देने वाला बनने की सलाह दी। कहा कि भारत का एक विकसित राष्ट्र और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सफर नवाचार, उद्यमिता और जोखिम उठाने की क्षमता की मांग करता है। स्टार्टअप इंडिया, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म का अन्वेषण करें, जिनमें आपके शिक्षण संस्थान द्वारा स्थापित उत्कृष्ट सुविधाएं भी शामिल हैं।
विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन का महत्व जरूरी
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर इसरो अहमदाबाद के हेड-एम्पलीफायर डिवीजन की साइंटिस्ट/ इंजीनियर-जी पूजा श्रीवास्तव ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन के महत्व को बताया और ‘किस तरह कर्म द्वारा सिद्धि की प्राप्ति हो सकती है’ का गुरु मंत्र दिया। उन्होंने इसरो द्वारा स्वदेशी तकनीक पर आधारित नाविक सैटेलाइट सिस्टम के बारे में बताया जो कि इस समय देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। एसआरएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 1996 में बीटेक पहले बैच की विद्यार्थी रही पूजा ने कठिन परिश्रम को सफलता का मूल मंत्र बताया साथ ही अनुशासन, टीम वर्क, लीडरशिप पर भी ठीक से काम करने की सलाह दी। अपने नए साथियों को उन्होंने टेक्नोलॉजी के समाजोन्मुख डेवलपमेंट पर जोर दिया। कहा कि जितना मिला है उससे ज्यादा वापस करना जरूरी है। इसके लिए बैलेंस शीट बनाने की सलाह दी।
इससे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) प्रभाकर गुप्ता ने महाविद्यालयों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और यहां संचालित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष महाविद्यालयों में चार राष्ट्रीय सेमिनार एवं दो इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित हुईं। महाविद्यालय के शिक्षकों के 114 शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जनरलों में प्रकाशित हुए। 38 शोध-पत्रों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत किया गया है। महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं द्वारा इस वर्ष 18 शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुए। जबकि 20 शोध-पत्रों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में स्थान मिला।
रुचि शाह ने किया कार्यक्रम का संचालन
डॉ. प्रभाकर ने पिछले वर्ष से एसआरएमएस ट्रस्ट के शैक्षिक संस्थाओं में संचालित शैक्षणिक शुल्क माफी योजना का भी जिक्र किया और इस वर्ष 14 मेधावी विद्यार्थियों की फीस माफ किए जाने की जानकारी दी। समारोह के अंत में डायरेक्टर टीडीपी डॉ. अनुज कुमार ने सभी का आभार जताया और धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन रुचि शाह ने किया।
इस मौके आदित्य मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, देविशा मूर्ति, प्रोफेसर श्यामल गुप्ता, उषा गुप्ता, डॉ. रजनी अग्रवाल, गुरु मेहरोत्रा, डॉ. वीएन राय, डॉ. आलोक खरे, डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. जसप्रीत कौर, डॉ. मुथु महेश्वरी, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एमएस बुटोला, नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मुथु महेश्वरी, पैरामेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. जसप्रीत कौर, डीन पीजी डॉ. रोहित शर्मा, डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, डीन फार्मेसी डॉ. अमित शर्मा, डॉ. रीटा शर्मा सहित सभी शैक्षिक संस्थानों के डाय़रेक्टर, डीन, फैकेल्टी और स्टाफ मौजूद रहा।