लखनऊ: द होप फाउंडेशन के अध्यक्ष दिव्यांशु कुमार ने बुधवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दिव्यांशु कुमार ने मंत्री नरेन्द्र कश्यप को 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख मागें और प्रस्तावित समाधान
द होप फाउंडेशन के अध्यक्ष ने ज्ञापन के माध्यम से मंत्री नरेन्द्र कश्यप को कई समस्याओं से अवगत कराया और कुछ मागें भी उनके समक्ष रखीं। एनजीओ प्रांगण में न्यूरोडायवर्स बच्चों के लिए आधार सेवा केंद्र की स्थापना करने की बाद ज्ञापन के माध्यम से मंत्री के समक्ष रखी गईं। उन्होंने बताया कि द होप फाउंडेशन (लखनऊ) में एक स्थायी आधार सेवा केंद्र स्थापित किया जाए, जहां न्यूरोडायवर्स बच्चों के आधार पंजीकरण एवं अपडेटेशन की सुविधा उपलब्ध हो।
विशेष बच्चों के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया कठिन होती है, जिससे उनके माता-पिता को सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। संस्था में आधार सेवा केंद्र होने से बच्चों को शांत और अनुकूल माहौल में पंजीकरण की सुविधा मिलेगी। प्रशिक्षित स्टाफ और विशेषज्ञों की मदद से न्यूरोडायवर्स बच्चों के लिए विशेष सुविधा दी जा सकेगी।
मूल्यांकन और डायग्नोसिस शिविरों के आयोजन की मांग
प्रत्येक तीन महीने में सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं सरकारी चिकित्सकों की टीम के सहयोग से न्यूरोडायवर्स बच्चों के लिए नि:शुल्क मूल्यांकन एवं निदान शिविर एनजीओ परिसर में आयोजित किया जाए। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के सहयोग से शिविर आयोजित करने से बच्चों को उच्च स्तरीय मूल्यांकन एवं चिकित्सा सहायता मिल सकेगी। समय-समय पर निदान से बच्चों की प्रगति को ट्रैक किया जा सकेगा और आवश्यक चिकित्सा सेवाएँ सही समय पर उपलब्ध होंगी। इस प्रक्रिया से कम आय वाले परिवारों को सरकारी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे वे निजी महंगे क्लीनिकों पर निर्भर न रहें। सरकार इस योजना के तहत न्यूरोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और मनोरोग चिकित्सक को शामिल करे।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं पंजीकरण शिविर
ज्ञापन के माध्यम से मंत्री नरेन्द्र कश्यप से मांग की गई कि संस्थान में हर दो महीने में दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड के लिए विशेष शिविर आयोजित किया जाए। वर्तमान में, अभिभावकों को महीनों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि एनजीओ स्तर पर यह सुविधा मिले, तो यह प्रक्रिया सुगम हो जाएगी।
न्यूरोडायवर्स पुनर्वास में कार्यरत एनजीओ के लिए विशेष वित्तीय अनुदान योजना
सरकार गैर-लाभकारी पुनर्वास केंद्रों को विशेष अनुदान प्रदान करे, जिससे थेरेपी, पुनर्वास उपकरण, शिक्षण सामग्री, और आधुनिक तकनीकों को लागू किया जा सके। इस समय अधिकांश सहायता निजी केंद्रों को मिलती है, जबकि एनजीओ बिना लाभ के सेवा करते हैं और सरकारी सहायता के अधिक हकदार हैं।
न्यूरोडायवर्स पुनर्वास में कार्यरत एनजीओ के लिए कर मुक्त सहायता योजना
न्यूरोडायवर्स बच्चों के पुनर्वास में कार्यरत एनजीओ को जीएसटी और अन्य करों से छूट प्रदान की जाए। यह छूट मिलने से एनजीओ अधिकतम संसाधन बच्चों की सहायता में लगा सकेंगे।
सरकारी सीएसआर फंडिंग में एनजीओ की प्राथमिकता
न्यूरोडायवर्स पुनर्वास केंद्रों को सरकारी सीएसआर दिशानिर्देशों में प्राथमिकता दी जाए, जिससे कॉर्पोरेट फंडिंग का सीधा लाभ मिल सके।
स्पेशल एजुकेशन एवं पुनर्वास कार्ड योजना
न्यूरोडायवर्स बच्चों के माता-पिता को एक सरकारी पुनर्वास कार्ड जारी किया जाए, जिसका उपयोग केवल एनजीओ पुनर्वास केंद्रों में किया जा सके। इससे लाभकारी संस्थानों को दरकिनार कर केवल एनजीओ को सहयोग मिलेगा।
यूपी में ‘केंद्रीय पुनर्वास एवं समावेशन संस्थान’ की स्थापना
राज्य में एक विशेष केंद्रीय संस्थान स्थापित किया जाए, जहाँ न्यूरोडायवर्स बच्चों के समावेशन और पुनर्वास हेतु विशेष अनुसंधान एवं प्रशिक्षण दिया जाए। यह उत्तर प्रदेश को दिव्यांग पुनर्वास और अनुसंधान का राष्ट्रीय केंद्र बना सकता है।
एनजीओ को आधार पंजीकरण एवं दिव्यांग प्रमाण पत्र पंजीकरण हेतु आधिकारिक केंद्र घोषित किया जाए
एनजीओ को सरकार द्वारा अधिकृत आधार और दिव्यांग प्रमाण पत्र केंद्र के रूप में कार्य करने की अनुमति दी जाए। इससे अभिभावकों की परेशानी कम होगी, और एनजीओ की भूमिका सशक्त होगी।
एनजीओ संचालित पुनर्वास केंद्रों को ‘राज्य सहयोगी’ का दर्जा
अनुभवी पुनर्वास एनजीओ को “राज्य सहयोगी” घोषित किया जाए, जिससे वे सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भाग ले सकें। एनजीओ को अधिक वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग मिलेगा, जिससे वे अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकेंगे।
वहीं, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने आश्वासन दिया कि इन सभी बिन्दुओं पर गहन चर्चा की जायेगी दिव्यांगजनों के हितों के लिए विशेष कदम उठाए जायेंगे।